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करोड़ों का बकाया और प्रशासन की चुप्पी—आखिर किसके संरक्षण में हैं बकायेदार ठेकेदार?

📅 18 Jul 2026, 11:22 AM🔥 47 views

📋 खबर का सार (Summary)
55 बकायेदार ठेकेदारों पर करोड़ों का बकाया, आखिर कार्रवाई कब? दरगाह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल।

(तौकीर आलम पत्रकार)पिरान कलियर। विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला श्रद्धालुओं की सुविधाओं का नहीं, बल्कि दरगाह की आय से जुड़े करोड़ों रुपये के बकाया का है। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार वर्ष 2009-10 से 2019-20 के बीच विभिन्न ठेकों से संबंधित 55 ठेकेदारों पर दरगाह की बड़ी धनराशि बकाया दर्ज है। यह तथ्य सामने आने के बाद दरगाह प्रशासन की कार्यप्रणाली, वित्तीय पारदर्शिता और वसूली व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

दस्तावेजों के अनुसार पार्किंग, दुकानें, टॉयलेट, गेस्ट हाउस, चादर, हलवा, कैंटीन सहित अन्य ठेकों से जुड़े कई ठेकेदार वर्षों से लाखों रुपये की बकाया राशि जमा नहीं कर पाए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि यह धनराशि वर्षों से बकाया है, तो इसकी वसूली के लिए अब तक प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए?

यह केवल बकाया राशि का मामला नहीं है, बल्कि दरगाह की आर्थिक व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय है। यदि समय पर वसूली होती, तो इसी धन से श्रद्धालुओं के लिए बेहतर साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, जल निकासी, सुरक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा सकता था। लेकिन करोड़ों रुपये की राशि वर्षों तक बकाया रहने से दरगाह और श्रद्धालुओं—दोनों का नुकसान हुआ है।

सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी है कि क्या इन बकायेदार ठेकेदारों को किसी का संरक्षण प्राप्त है? यदि नहीं, तो फिर इतने वर्षों बाद भी करोड़ों रुपये की वसूली क्यों नहीं हो सकी? क्या केवल नोटिस जारी कर औपचारिकता पूरी कर दी गई, या वास्तव में किसी के विरुद्ध राजस्व वसूली, आरसी अथवा अन्य कानूनी कार्रवाई भी की गई?

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई आम नागरिक या छोटा दुकानदार नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके विरुद्ध तत्काल कार्रवाई होती है। लेकिन वर्षों से करोड़ों रुपये बकाया रखने वाले ठेकेदारों के मामलों में प्रशासन की अपेक्षित सख्ती दिखाई नहीं देती। इससे स्वाभाविक रूप से प्रशासन की निष्पक्षता और कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगते हैं।

दरगाह प्रशासन की चुप्पी भी कई सवालों को जन्म देती है। आखिर ऐसी कौन-सी वजह है कि करोड़ों रुपये का बकाया होने के बावजूद कठोर कार्रवाई सामने नहीं आई? क्या प्रशासन किसी दबाव में है, या फिर व्यवस्था की कमजोरियों का लाभ बकायेदार उठा रहे हैं? इन सवालों का स्पष्ट और सार्वजनिक उत्तर दिया जाना चाहिए।

जनता अब जानना चाहती है कि—

- वर्तमान में 55 ठेकेदारों पर कुल कितना बकाया है?

- अब तक कितनी राशि की वसूली की जा चुकी है?

- कितने बकायेदारों को नोटिस जारी किए गए?

- कितने ठेके निरस्त किए गए?

- कितनों के विरुद्ध राजस्व वसूली, आरसी या अन्य कानूनी कार्रवाई की गई?

- यदि प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

पारदर्शिता और जवाबदेही किसी भी सार्वजनिक संस्था की विश्वसनीयता का आधार होती है। ऐसे में दरगाह प्रशासन को पूरे मामले की अद्यतन स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए। बकायेदारों की वर्तमान सूची, वसूली की प्रगति और की गई कार्रवाई का पूरा विवरण श्रद्धालुओं और आम जनता के सामने रखा जाना चाहिए, ताकि उठ रहे सभी सवालों का तथ्यात्मक उत्तर मिल सके।

यदि इस पूरे प्रकरण में किसी स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही, नियमों की अनदेखी या जिम्मेदारी तय होती है, तो निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और करोड़ों रुपये के सार्वजनिक धन के मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जा सकती।

अब समय आ गया है कि दरगाह प्रशासन स्पष्ट रूप से जवाब दे—55 बकायेदार ठेकेदारों पर कार्रवाई कब होगी? करोड़ों रुपये की वसूली कब पूरी होगी? और यदि अब तक कार्रवाई नहीं हुई, तो उसकी जवाबदेही कौन लेगा?


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तौकीर आलम
तौकीर आलम
संपादक

डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ, वेब डेवलपर और जनवाणी एक्सप्रेस के मुख्य संपादक। पिछले कई वर्षों से उत्तराखंड और राष्ट्रीय स्तर पर निष्पक्ष पत्रकारिता और डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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