REGULAR INDIA NEWS हिन्दी
BREAKING NEWS

दरगाह साबिर पाक के सालाना उर्स में सफाई व्यवस्था सवालों के घेरे में—बदबू और गंदगी से जायरीनों में बीमारी फैलने का खतरा।

📅 29 Aug 2026, 11:32 AM🔥 42 views

📋 खबर का सार (Summary)
सफाई ठेके के नाम पर लाखों खर्च, फिर भी गंदगी के ढेर!

(तौकीर आलम पत्रकार)पिरान कलियर। दरगाह साबिर पाक के सालाना उर्स/मेले में देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में जायरीन पहुंच रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर दरगाह क्षेत्र में सफाई व्यवस्था की बदहाल तस्वीर प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर रही है। सफाई ठेके के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद कई स्थानों पर कूड़े के ढेर, गंदगी और दुर्गंध की स्थिति बनी हुई है।

उर्स जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में जहां साफ-सफाई को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए, वहीं गंदगी के कारण जायरीनों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह जमा कूड़ा और उससे उठती दुर्गंध संक्रामक बीमारियों के खतरे को बढ़ा सकती है। बरसात के मौसम में जलभराव और गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है, जिससे डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा पैदा हो सकता है।

(ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल)

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सफाई व्यवस्था के लिए लाखों रुपये का ठेका दिया गया है, तो उसके बावजूद दरगाह क्षेत्र में सफाई व्यवस्था क्यों चरमराई हुई है? क्या ठेकेदार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार सफाई कराई जा रही है? क्या सफाई कार्य की नियमित निगरानी की जा रही है? और यदि निगरानी हो रही है तो गंदगी के ये ढेर जिम्मेदार अधिकारियों की नजर से कैसे बच रहे हैं?

जायरीनों का कहना है कि उर्स के दौरान सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखना केवल ठेकेदार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संबंधित विभाग और दरगाह प्रशासन की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। लापरवाही का खामियाजा हजारों जायरीनों को भुगतना पड़ सकता है।

(जांच और भुगतान की समीक्षा की उठी मांग)

स्थानीय लोगों और जायरीनों ने मांग की है कि सफाई ठेके की निष्पक्ष जांच कराई जाए। ठेकेदार को दिए गए कार्यादेश, निर्धारित सफाई मानक, कर्मचारियों की संख्या और मौके पर किए जा रहे कार्य का मिलान कराया जाए। यदि जांच में लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार ठेकेदार पर कार्रवाई करने के साथ-साथ भुगतान की भी समीक्षा की जाए।

लोगों का कहना है कि सफाई के नाम पर सरकारी अथवा दरगाह की धनराशि खर्च होने के बावजूद यदि जमीन पर सफाई दिखाई नहीं देती, तो इसकी जवाबदेही तय होना जरूरी है। उर्स में आने वाले जायरीनों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

(अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग)

जायरीनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दरगाह क्षेत्र का तत्काल निरीक्षण कराकर कूड़े के ढेर हटवाए जाएं, नियमित कूड़ा उठान सुनिश्चित किया जाए और मच्छरों की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। साथ ही सफाई ठेकेदार की कार्यप्रणाली की जांच कर लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाए।

अब देखना यह है कि सफाई के नाम पर लाखों रुपये का ठेका लेने वाले ठेकेदार की जिम्मेदारी तय होती है या फिर उर्स समाप्त होने तक जायरीन इसी गंदगी और दुर्गंध के बीच व्यवस्था का खामियाजा भुगतते रहेंगे।


इस खबर को शेयर करें:
WhatsApp
तौकीर आलम
तौकीर आलम
संपादक

डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ, वेब डेवलपर और जनवाणी एक्सप्रेस के मुख्य संपादक। पिछले कई वर्षों से उत्तराखंड और राष्ट्रीय स्तर पर निष्पक्ष पत्रकारिता और डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

पूरा प्रोफाइल देखें →